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आन्‍ध्र प्रदेश और मैसूर (राज्‍यक्षेत्र अन्‍तरण) अधिनियम, 1968 (The Andhra Pradesh and Mysore (Transfer of Territories) Act, 1968

आन्ध्र प्रदेश और मैसूर (राज्यक्षेत्र अन्तरण) अधिनियम, 1968 भारत सरकार द्वारा पारित एक महत्वपूर्ण कानून है जिसका उद्देश्य मैसूर राज्य (वर्तमान कर्नाटक) से आन्ध्र प्रदेश राज्य को कुछ राज्यक्षेत्रों का हस्तांतरण करना था। यह अधिनियम 22 अगस्त, 1968 को लागू हुआ और इसके माध्यम से कोलार जिले के बागेपल्ली तालुका के "अबाकावरीपल्ली" गाँव का एक भाग आन्ध्र प्रदेश को सौंपा गया। यह हस्तांतरण प्रशासनिक और सीमा संबंधी मुद्दों को सुलझाने के लिए किया गया था।
भारत की स्वतंत्रता के बाद, राज्यों का पुनर्गठन भाषाई और प्रशासनिक आधार पर किया गया। 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत राज्यों की सीमाएँ निर्धारित की गईं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में सीमा विवाद बने रहे। आन्ध्र प्रदेश और मैसूर (कर्नाटक) के बीच भी कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर मतभेद थे, जिन्हें सुलझाने के लिए 1968 का यह अधिनियम बनाया गया। इस अधिनियम ने दोनों राज्यों के बीच सीमा निर्धारण को स्पष्ट किया और प्रशासनिक सुविधा के लिए क्षेत्रों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को वैधानिक रूप दिया।
इस अधिनियम ने दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने में मदद की।
स्थानीय निवासियों के लिए प्रशासनिक और न्यायिक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित की गई।
क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा मिला और भविष्य में होने वाले विवादों को रोकने का प्रयास किया गया।
आन्ध्र प्रदेश और मैसूर (राज्यक्षेत्र अन्तरण) अधिनियम, 1968 एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है जिसने दो राज्यों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने और प्रशासनिक सुविधा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह अधिनियम भारत के संघीय ढाँचे में राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय का एक उदाहरण है।

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