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उच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्त) अधिनियम, 1954

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 221 और 222 के प्रावधानों को लागू करने के लिए उच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1954 पारित किया गया था। यह अधिनियम देश के उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतन, भत्तों, पेंशन, छुट्टियों और अन्य सेवा शर्तों को नियमित करता है, ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा बनी रहे। इस कानून के तहत न्यायाधीशों के वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा सके और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित हो सके। इस अधिनियम में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं, ताकि न्यायाधीशों की सेवा शर्तें समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप बनी रहें। यह कानून न्यायपालिका की स्वायत्तता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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