कंपनी (राष्ट्रीय निधि दान) अधिनियम,1951 (The Companies (Donation to National Funds) Act, 1951)
कंपनी (राष्ट्रीय निधि दान) अधिनियम, 1951 भारतीय संसद द्वारा पारित एक महत्वपूर्ण कानून है जिसका उद्देश्य कंपनियों को राष्ट्रीय महत्व के निधियों को दान करने के लिए अधिकृत करना है। यह अधिनियम 17 अक्टूबर, 1951 को लागू हुआ और इसे कंपनी अधिनियम, 1913 के तहत परिभाषित कंपनियों पर लागू किया गया। इसका विस्तार पूरे भारत में है, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भी शामिल हैं, जिन्हें बाद में अधिसूचना के माध्यम से इसके दायरे में लाया गया।
1950 के दशक में, भारत स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय एकता और विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक पहलों पर ध्यान केंद्रित कर रहा था। इसी क्रम में, राष्ट्रीय निधियों को समर्थन देने के लिए कंपनियों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने हेतु यह अधिनियम लाया गया। यह अधिनियम कंपनी अधिनियम, 1913 के प्रावधानों के तहत कंपनियों को विशेष रूप से "गांधी राष्ट्रीय स्मारक निधि" और "सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय स्मारक निधि" जैसे निधियों को दान करने की अनुमति देता है। साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित अन्य राष्ट्रीय निधियों को भी इसके दायरे में शामिल किया गया।
यह अधिनियम कंपनियों को राष्ट्रीय हितों में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने वाला एक प्रारंभिक कदम माना जा सकता है। इसके माध्यम से कंपनियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, और राष्ट्रीय स्मारकों के विकास में योगदान दिया, जिससे राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका सुनिश्चित हुई।