कलकत्ता भूमिगत रेल (प्रचालन और अनुरक्षण) अस्थायी उपबन्ध अधिनियम, 1985 (The Calcutta Metro Railway (Operation and Maintenance) Temporary Provisions Act, 1985)
कलकत्ता (अब कोलकाता) भूमिगत रेलवे प्रणाली, जिसे सामान्यतः "मेट्रो रेल" के नाम से जाना जाता है, भारत की पहली भूमिगत रेल सेवा है। इसकी शुरुआत 1984 में हुई थी। इस अधिनियम को 1985 में पारित किया गया था, जिसका उद्देश्य भूमिगत रेल के प्रचालन और अनुरक्षण के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करना था। यह अधिनियम 22 अक्टूबर, 1984 से प्रभावी माना गया और यह विशेष रूप से कोलकाता महानगर क्षेत्र पर लागू होता है। इस अधिनियम का निर्माण भूमिगत रेल प्रणाली के सुचारू संचालन, यात्रियों की सुरक्षा और संबंधित मुद्दों के प्रबंधन के लिए किया गया था।
कलकत्ता भूमिगत रेल (प्रचालन और अनुरक्षण) अस्थायी उपबंध अधिनियम, 1985 एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है जिसने कोलकाता मेट्रो रेल के संचालन और रखरखाव के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान किया। इस अधिनियम के माध्यम से यात्रियों की सुरक्षा, अनुशासन और रेल प्रशासन की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया है। यह अधिनियम भारत में शहरी परिवहन के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ और आज भी इसके प्रावधान प्रासंगिक हैं।