केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन)अधिनियम, 1995 (The Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995)
1990 के दशक में भारत में केबल टेलीविजन का तेजी से विस्तार हुआ, लेकिन इसके साथ ही अराजकता और अनियमितताएँ भी बढ़ीं। केबल ऑपरेटर बिना किसी नियमन के मनमाने ढंग से चैनल प्रसारित करते थे, जिससे अश्लीलता, हिंसा और अन्य अनुचित सामग्री का प्रसार होता था। इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 लागू किया। यह अधिनियम 25 मार्च, 1995 को पारित हुआ और 29 सितंबर, 1994 से प्रभावी माना गया। इसका उद्देश्य केबल टेलीविजन नेटवर्क के संचालन को विनियमित करना, प्रसारण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और दर्शकों के हितों की रक्षा करना था।
2011 का संशोधन: इसमें डिजिटलाइजेशन को अनिवार्य बनाया गया और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) को अधिकार दिए गए।
2003 का संशोधन: अपराधों को संज्ञेय बनाया गया और दंड प्रावधानों को सख्त किया गया।
केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 ने भारत में केबल टीवी उद्योग को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह अधिनियम न केवल प्रसारण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की भी रक्षा करता है। डिजिटलाइजेशन और नियामक ढाँचे के माध्यम से, यह अधिनियम आज भी प्रासंगिक बना हुआ है।