जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय अधिनियम, 1966 (The Jawaharlal Nehru University Act, 1966)
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की स्थापना 1966 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय अधिनियम, 1966 के तहत की गई थी। यह विश्वविद्यालय दिल्ली में स्थित है और इसका उद्देश्य ज्ञान, प्रज्ञान और समझदारी का प्रसार करना है, विशेष रूप से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता, लोकतांत्रिक जीवन शैली, अंतर्राष्ट्रीय सद्भाव और समाज की समस्याओं के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। यह विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक प्रमुख संस्थान के रूप में जाना जाता है।
जेएनयू की स्थापना भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विजन और मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी। नेहरू का मानना था कि शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से ही देश का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास संभव है। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, जेएनयू को एक ऐसे संस्थान के रूप में विकसित किया गया जो बौद्धिक स्वतंत्रता, बहुलवाद और समाज के प्रति जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करता है। विश्वविद्यालय ने अपनी स्थापना के बाद से ही शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जेएनयू का मुख्य उद्देश्य अध्ययन और अनुसंधान के माध्यम से ज्ञान का प्रसार करना है। विश्वविद्यालय में विभिन्न विद्या शाखाएँ हैं, जो मानविकी, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्रदान करती हैं। विश्वविद्यालय ने अंतरविषयक अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की है और छात्रों को वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके अलावा, जेएनयू ने अंतर्राष्ट्रीय छात्रों और शिक्षकों के लिए विशेष सुविधाएँ प्रदान की हैं।
जेएनयू ने भारतीय समाज की विविधता और संस्कृति के अध्ययन के लिए विशेष विभाग और संस्थान स्थापित किए हैं। विश्वविद्यालय ने छात्रों और शिक्षकों में सामाजिक चेतना और देश की आवश्यकताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए हैं। इसके अलावा, जेएनयू ने अनुसंधान और शिक्षण के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।