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डा० राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वरविद्यालय अधिनियम, 2016 (The Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University Act, 2016)

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग वर्ष 2016 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1987 के तहत प्रशस्त हुआ। इस अधिनियम के माध्यम से पूसा, बिहार में स्थित राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय को एक नए रूप में "डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय" के नाम से पुनर्गठित किया गया। यह परिवर्तन कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था। विश्वविद्यालय का मुख्यालय पूसा में स्थित है, जो अपने ऐतिहासिक महत्व और कृषि अनुसंधान में योगदान के लिए जाना जाता है।

इस अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय के प्रमुख उद्देश्यों में कृषि एवं सहबद्ध विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में शिक्षा प्रदान करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना, विस्तार शिक्षा कार्यक्रमों का संचालन करना, और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित करना शामिल है। विश्वविद्यालय का दायरा बिहार राज्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाता है।
अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय को परिनियम, अध्यादेश, और विनियम बनाने का अधिकार प्रदान किया गया है। ये नियम विश्वविद्यालय के संचालन, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों, और छात्रों के अनुशासन से संबंधित हैं। इन्हें राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है और संसद के समक्ष रखा जाता है।

अधिनियम के लागू होने के बाद, पूर्ववर्ती राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के सभी अधिकार, दायित्व, और संपत्ति नए विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दिए गए। कर्मचारियों और छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान बनाए गए, जिनमें सेवा शर्तों और पेंशन संबंधी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
विश्वविद्यालय को कृषि एवं संबंधित विषयों में डिग्री, डिप्लोमा, और प्रमाणपत्र प्रदान करने का अधिकार है। यह छात्रों के लिए निवास, अनुशासन, और शैक्षणिक सुविधाएं प्रदान करता है। अनुसंधान के क्षेत्र में विश्वविद्यालय फसल उत्पादन, बागवानी, पशु चिकित्सा, और कृषि प्रौद्योगिकी जैसे विषयों पर कार्य करता है। विस्तार शिक्षा के माध्यम से यह किसानों और ग्रामीण समुदायों तक नवीनतम तकनीकों और ज्ञान को पहुँचाता है।

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