प्रेसिडेंसी नगर दिवाला अधिनियम,1909 (The Presidency Towns Insolvency Act, 1909)
प्रेसिडेंसी नगर दिवाला अधिनियम, 1909 को ब्रिटिश भारत में दिवालियापन से संबंधित मामलों को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया था। यह अधिनियम मुख्य रूप से तीन प्रेसिडेंसी नगरों—कलकत्ता (अब कोलकाता), मद्रास (अब चेन्नई), और बॉम्बे (अब मुंबई)—में लागू था। इसका उद्देश्य दिवालियापन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना, लेनदारों और देनदारों के अधिकारों की रक्षा करना, तथा दिवालियापन से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करना था। इस अधिनियम ने दिवालियापन की प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए।
प्रेसिडेंसी नगर दिवाला अधिनियम, 1909 ने भारत में दिवालियापन कानून के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय के साथ, इस अधिनियम में कई संशोधन किए गए, जैसे 1926, 1930, 1939, और 1950 के संशोधन, जिन्होंने इसकी धाराओं को अद्यतन किया और नए प्रावधान जोड़े। 2016 में भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नए दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) ने इस अधिनियम सहित कई पुराने कानूनों को प्रतिस्थापित कर दिया, जिससे दिवालियापन प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित और व्यवसाय-अनुकूल बन गई।