योजना और वास्तुकला विद्यालय अधिनियम, 2014 (The School of Planning and Architecture Act, 2014)
योजना और वास्तुकला विद्यालय अधिनियम, 2014 एक महत्वपूर्ण केंद्रीय अधिनियम है, जिसे भारत में योजना एवं वास्तुकला के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान को संस्थागत रूप प्रदान करने के लिए पारित किया गया था। यह अधिनियम पहले से सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत तीन विद्यालयों – नई दिल्ली, भोपाल और विजयवाड़ा में स्थित – को औपचारिक रूप से "योजना और वास्तुकला विद्यालय" के रूप में स्थापित करता है तथा उन्हें निगमित निकाय का दर्जा प्रदान करता है।
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य वास्तुकला, नगर योजना, डिजाइन एवं संबद्ध क्षेत्रों में उत्कृष्ट शैक्षणिक मानक स्थापित करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और इन विद्यालयों को स्वायत्तता प्रदान करते हुए उनके शासन, प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन तथा शैक्षणिक गतिविधियों के लिए एक कानूनी ढाँचा उपलब्ध कराना है। यह शिक्षण संस्थानों के रूप में उनकी मान्यता सुनिश्चित करता है और राष्ट्रपति को कुलाध्यक्ष का पद देकर इनकी गुणवत्ता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
भारतीय कानूनी एवं शैक्षणिक प्रणाली में इस अधिनियम का विशेष महत्व है क्योंकि इसने असंगठित रूप से कार्यरत संस्थाओं को एक समान कानूनी पहचान, स्थायित्व और राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिया है। यह अधिनियम उच्च शिक्षा के तकनीकी संस्थानों के विनियमन एवं विकास की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।