राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान अधिनियम, 2014 (The National Institute of Design Act, 2014)
राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) की स्थापना भारत में डिजाइन शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। इसकी शुरुआत 1961 में अहमदाबाद में एक स्वायत्त संस्थान के रूप में हुई, जिसे बाद में सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत किया गया। समय के साथ, देश के विभिन्न क्षेत्रों में डिजाइन शिक्षा की मांग को पूरा करने के लिए अन्य NID संस्थानों की स्थापना की गई, जैसे भोपाल, जोरहाट, कुरुक्षेत्र, और आंध्र प्रदेश में। इन संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व की संस्थाओं के रूप में मान्यता देने और उनके प्रशासनिक ढाँचे को मजबूत करने के लिए 2014 में राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान अधिनियम पारित किया गया।
अधिनियम का उद्देश्य
इस अधिनियम का प्राथमिक उद्देश्य NID को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के रूप में घोषित करना था, ताकि उन्हें शिक्षा, अनुसंधान, और प्रशिक्षण के क्षेत्र में स्वायत्तता और मानकों को बनाए रखने में सहायता मिल सके। अधिनियम के तहत, इन संस्थानों को डिजाइन के विभिन्न क्षेत्रों में डिग्री, डिप्लोमा, और अन्य शैक्षणिक उपाधियाँ प्रदान करने का अधिकार दिया गया।
महत्व और प्रभाव
इस अधिनियम ने NID संस्थानों को एक मान्यता प्राप्त और संगठित ढाँचा प्रदान किया, जिससे उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध क्षमता में वृद्धि हुई। यह अधिनियम डिजाइन शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने और उद्योग के साथ सहयोग को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।