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राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (The National Food Security Act, 2013)

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 भारत सरकार द्वारा देश की जनता को सस्ती दरों पर पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम का उद्देश्य देश के गरीब और कमजोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है, जिससे उन्हें भुखमरी और कुपोषण से बचाया जा सके। यह अधिनियम 10 सितंबर, 2013 को लागू हुआ और इसे संसद द्वारा पारित किया गया। इसके तहत देश की लगभग दो-तिहाई आबादी को सस्ते दामों पर अनाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
भारत में खाद्य सुरक्षा की अवधारणा नया नहीं है। स्वतंत्रता के बाद से ही सरकार ने गरीबों को सस्ते दामों पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई हैं, जैसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)। हालांकि, इन योजनाओं में भ्रष्टाचार और अक्षमता के कारण इनका लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा था। 2013 का यह अधिनियम इन समस्याओं को दूर करने और खाद्य सुरक्षा को एक कानूनी अधिकार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम था।
कुपोषण का निवारण: अधिनियम में कुपोषण से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेष पोषण सहायता प्रदान करने का प्रावधान है।
शिकायत निवारण तंत्र: अधिनियम में खाद्य सुरक्षा से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए राज्य और जिला स्तर पर तंत्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।
पारदर्शिता और जवाबदेही: अधिनियम में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कई उपाय शामिल हैं, जैसे कि ई-गवर्नेंस और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 भारत में सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अधिनियम न केवल गरीबों को भोजन का अधिकार देता है, बल्कि देश में खाद्य सुरक्षा और पोषण के स्तर को सुधारने का भी प्रयास करता है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन में अभी भी कई चुनौतियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार और समाज को मिलकर काम करना होगा।

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