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शिलांग (राइफल रेंज और उमलांग) छावनी विधियों की एकरूपता अधिनियम, 1954 (The Shillong (Rifle Range and Umlang) Cantonment Laws Uniformity Act, 1954)

भारत में छावनी क्षेत्रों का प्रशासन और उनसे जुड़े कानून ब्रिटिश काल से ही विशेष महत्व रखते हैं। स्वतंत्रता के बाद, इन क्षेत्रों में लागू विभिन्न विधियों में एकरूपता लाने और प्रशासनिक सुविधा के लिए शिलांग (राइफल रेंज और उमलांग) छावनी विधियों की एकरूपता अधिनियम, 1954 पारित किया गया। यह अधिनियम विशेष रूप से मेघालय (तत्कालीन असम के भाग) में स्थित शिलांग छावनी और उमलांग क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहाँ सैन्य गतिविधियों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय सुनिश्चित करना आवश्यक था।
अनुसूचित क्षेत्रों की परिभाषा (धारा 2 व अनुसूची):
शिलांग (राइफल रेंज) छावनी: इसका क्षेत्रफल लगभग 1,962 एकड़ है और यह उमियम नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। सीमा चिह्नों (स्तंभ संख्याओं) के माध्यम से इसकी भौगोलिक सीमाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है।
उमलांग छावनी: इसकी सीमाएँ ब्रेम रे सीमा-स्तंभों से परिभाषित हैं और यह शिलांग छावनी से अलग है।
कठिनाइयों का निवारण (धारा 4):
यदि विधियों के एकीकरण के दौरान कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी करके उचित समाधान कर सकती है।
अधिनियम में उल्लिखित सीमाएँ 1926 और 1931 के सर्वेक्षणों पर आधारित हैं, जिनमें मुख्य सीमा चिह्नों (जैसे स्तंभ संख्या 1 से 26 तक) और दिशात्मक कोणों (जैसे 308° 18’) का विवरण शामिल है।
शिलांग छावनी की सीमाएँ प्राकृतिक स्थलों (जैसे नदियाँ, पहाड़ियाँ) और मानव-निर्मित संरचनाओं (जैसे राइफल रेंज, गोली चलाने के स्थान) से जुड़ी हैं।
यह अधिनियम भारत के छावनी क्षेत्रों में विधिक एकरूपता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इसने सैन्य और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल बनाने, सीमाओं को स्पष्ट करने और कानूनी अनिश्चितताओं को दूर करने में मदद की। आज भी, शिलांग और उमलांग क्षेत्रों के प्रशासनिक ढाँचे में इस अधिनियम की भूमिका महत्वपूर्ण है।

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