सशस्त्रग सीमा बल अधिनियम, 2007 (The Sashastra Seema Bal Act, 2007)
सशस्त्र सीमा बल अधिनियम, 2007 भारत की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इस अधिनियम को 20 दिसंबर, 2007 को लागू किया गया था और यह संसद द्वारा पारित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सशस्त्र सीमा बल (SSB) के गठन, संचालन और नियंत्रण को विनियमित करना है, जो देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। यह अधिनियम सीमा सुरक्षा के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा और अन्य संबंधित कर्तव्यों को पूरा करने के लिए बल के सदस्यों के अधिकारों, कर्तव्यों और दंड प्रणाली को परिभाषित करता है।
प्रारंभिक प्रावधान (अध्याय 1):
अधिनियम का संक्षिप्त नाम "सशस्त्र सीमा बल अधिनियम, 2007" है और यह केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तिथि से लागू होता है।
इसमें विभिन्न शब्दों की परिभाषाएं शामिल हैं, जैसे "सक्रिय ड्यूटी", "बटालियन", "नागरिक अपराध", "शत्रु", आदि, जो अधिनियम के दायरे को स्पष्ट करते हैं।
यह अधिनियम बल के सदस्यों, जिनमें अधिकारी, अधीनस्थ अधिकारी और अन्य सदस्य शामिल हैं, पर लागू होता है।
बल का गठन और सेवा शर्तें (अध्याय 2):
सशस्त्र सीमा बल का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है और इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत की सीमाओं की सुरक्षा करना है।
बल के सदस्यों की नियुक्ति, सेवा शर्तें, अनुशासन, और निर्देशन केंद्र सरकार और महानिदेशक के अधीन होते हैं।
सदस्यों को भारत के भीतर और बाहर सेवा करने का दायित्व होता है और वे अपने पद से इस्तीफा नहीं दे सकते जब तक कि विशेष अनुमति न हो।
अपराध और दंड (अध्याय 3):
अधिनियम में विभिन्न अपराधों को परिभाषित किया गया है, जैसे शत्रु से संबंधित अपराध, विद्रोह, अभियोग लगाना, अनुपस्थिति, आदि।
गंभीर अपराधों, जैसे शत्रु के साथ मिलीभगत या विद्रोह, के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास जैसे कठोर दंड का प्रावधान है।
अनुशासनहीनता, आदेशों की अवहेलना, और संपत्ति से संबंधित अपराधों के लिए भी विभिन्न दंड निर्धारित हैं।
दंड प्रक्रिया (अध्याय 4):
बल न्यायालयों (जनरल, पैटी, और समरी) द्वारा दंड दिए जा सकते हैं, जिनमें मृत्युदंड, कारावास, पदच्युति, वेतन कटौती आदि शामिल हैं।
दंडों को संयोजित किया जा सकता है और विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को छोटे दंड देने का अधिकार है।
वेतन और भत्तों में कटौती (अध्याय 5):
अनुपस्थिति, अभियोग, या अनुशासनहीनता के मामलों में सदस्यों के वेतन और भत्तों में कटौती की जा सकती है।
कटौती की सीमाएं और प्रक्रियाएं निर्धारित की गई हैं ताकि अनुचित कार्रवाई से बचा जा सके।