सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (The Information Technology Act, 2000)
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) भारत की संसद द्वारा 9 जून, 2000 को पारित किया गया था और यह 17 अक्टूबर, 2000 से लागू हुआ। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन (ई-कॉमर्स) को कानूनी मान्यता प्रदान करना, डिजिटल हस्ताक्षर (डिजिटल सिग्नेचर) को वैध बनाना, और साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करना था। यह अधिनियम संयुक्त राष्ट्र की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (UNCITRAL) द्वारा प्रस्तावित मॉडल कानूनों से प्रेरित था, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक व्यापार को बढ़ावा देना था।
डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर की मान्यता (धारा 3 और 5):
इस अधिनियम ने डिजिटल हस्ताक्षर को कानूनी मान्यता प्रदान की, जिससे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है।
धारा 5 के अनुसार, किसी भी कानूनी प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनिक रूप में संग्रहीत या प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को मान्यता दी जाती है, बशर्ते वे निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा करते हों।
सरकारी कार्यों में इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रियाओं का उपयोग (धारा 6, 7, और 8):
सरकारी दस्तावेजों, अधिसूचनाओं, और रिकॉर्ड्स को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित और संग्रहीत करने की अनुमति दी गई।
इलेक्ट्रॉनिक राजपत्र (ई-गजट) को कानूनी मान्यता प्रदान की गई।
साइबर अपराध और दंड (धारा 65 से 74):
कंप्यूटर सिस्टम में अनधिकृत पहुंच, डेटा चोरी, वायरस फैलाने, और हैकिंग जैसे अपराधों के लिए दंड का प्रावधान किया गया।
धारा 66 के तहत कंप्यूटर से संबंधित अपराधों के लिए कारावास और जुर्माने की सजा का उल्लेख है।
धारा 66ए (जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द कर दिया गया) में आपत्तिजनक संदेश भेजने को अपराध माना गया था।
प्रमाणन प्राधिकरण (CA) और डिजिटल प्रमाणपत्र (धारा 17 से 34):
डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्रमाणन प्राधिकरणों (Certifying Authorities) की स्थापना की गई।
इन प्राधिकरणों को नियंत्रित करने के लिए एक नियंत्रक (Controller) की नियुक्ति का प्रावधान किया गया।
साइबर अपीलीय न्यायाधिकरण (धारा 48 से 58):
साइबर अपीलीय न्यायाधिकरण (Cyber Appellate Tribunal) की स्थापना की गई, जो अधिनियम के तहत होने वाले विवादों का निपटारा करता है।
2008 में, इस अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए, जिनमें साइबर आतंकवाद, बाल पोर्नोग्राफी, और डेटा सुरक्षा से संबंधित नए प्रावधान जोड़े गए। इन संशोधनों के बाद, अधिनियम और अधिक व्यापक हो गया।
इस अधिनियम ने भारत में ई-गवर्नेंस और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दिया।
साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा प्रदान किया।
डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों को मजबूती प्रदान की।