अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (The Advocates Act, 1961)
अधिवक्ता अधिनियम, 1961 भारत में कानूनी पेशे को विनियमित करने वाला एक महत्वपूर्ण कानून है। इसका उद्देश्य वकीलों के पेशेवर मानकों, अधिकारों, कर्तव्यों और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं को परिभाषित करना है। यह अधिनियम देशभर में वकीलों के रजिस्ट्रेशन, शिक्षा, और आचार संहिता को नियंत्रित करता है तथा राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बार काउंसिलों के गठन का प्रावधान करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में कानूनी पेशे को विनियमित करने की आवश्यकता ब्रिटिश काल से ही महसूस की जा रही थी। 1926 में पहली बार "भारतीय वकील अधिनियम" लागू किया गया, जिसने वकीलों के पंजीकरण और अनुशासन के लिए बार काउंसिलों की स्थापना की। हालाँकि, स्वतंत्रता के बाद देश के बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य और कानूनी शिक्षा में सुधार की आवश्यकता को देखते हुए 1961 में एक नए अधिनियम की रचना की गई। यह अधिनियम 19 मई, 1961 को लागू हुआ और इसे देशभर में लागू किया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर और गोवा जैसे क्षेत्रों को बाद में शामिल किया गया।
संशोधन और विकास
1961 के बाद से इस अधिनियम में कई संशोधन किए गए हैं, जिनमें 1973, 1993, और 2019 के संशोधन प्रमुख हैं। इन संशोधनों ने बार काउंसिलों की संरचना, वकीलों की योग्यता, और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं को और सशक्त बनाया है।






