आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (The Essential Commodities Act, 1955)
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 भारत की संसद द्वारा 1 अप्रैल, 1955 को लागू किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम का उद्देश्य देश में आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, व्यापार और वाणिज्य पर नियंत्रण स्थापित करना था, ताकि उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके और मूल्यों में अस्थिरता को रोका जा सके। यह अधिनियम ब्रिटिश काल के "डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स, 1939" और "आवश्यक वस्तु (अस्थायी अधिकार) अध्यादेश, 1946" से प्रेरित था, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान संसाधनों के प्रबंधन के लिए बनाए गए थे। स्वतंत्रता के बाद, देश को खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी कानून की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके परिणामस्वरूप यह अधिनियम अस्तित्व में आया।
अधिनियम में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं, जैसे 1971, 1974, 1984, और 2020 में, जिनमें स्टॉक सीमा, मूल्य नियंत्रण, और दंड संबंधी प्रावधानों को सशक्त बनाया गया।
2020 के संशोधन में कृषि उत्पादों (जैसे अनाज, दालें, प्याज) के संबंध में स्टॉक सीमा लागू करने के नियमों को स्पष्ट किया गया।
महत्व: यह अधिनियम आपातकालीन स्थितियों में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, मूल्य वृद्धि को रोकने, और कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सहायक रहा है।
आलोचना: कभी-कभी इसका दुरुपयोग होता है, जैसे कि अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से स्टॉक सीमा लागू करना या व्यापारियों पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाना, जिससे बाजार में अस्थिरता पैदा हो सकती है।






