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उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्त) अधिनियम, 1958

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 125 के प्रावधानों को कार्यान्वित करने के लिए उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1958 पारित किया गया था। यह अधिनियम भारत के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों के वेतन, भत्तों, पेंशन तथा अन्य सेवा शर्तों को नियमित करता है। इस कानून के माध्यम से न्यायाधीशों को उचित वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जाती है ताकि वे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से न्यायिक कार्यों का निर्वहन कर सकें। अधिनियम में न्यायाधीशों के मूल वेतन, महंगाई भत्ता, आवास सुविधा, चिकित्सा लाभ और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन जैसे विभिन्न लाभों का विस्तृत विवरण दिया गया है। समय-समय पर इस अधिनियम में संशोधन कर न्यायाधीशों के वेतन और सुविधाओं को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया गया है। यह कानून न्यायपालिका की स्वतंत्रता एवं गरिमा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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