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कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम, 1984

परिवारिक विवादों के शीघ्र एवं सुलहपूर्ण निपटारे हेतु कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम, 1984 भारत सरकार द्वारा लाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम का उद्देश्य पारिवारिक मामलों जैसे विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, संरक्षण और संपत्ति विवाद आदि से संबंधित मुकदमों को सामान्य न्यायालयों की अपेक्षा अधिक त्वरित, सरल एवं सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाना है। इसके तहत विशेष कुटुम्ब न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान किया गया है जो पारिवारिक विवादों को सुलझाने के लिए सुलह एवं मध्यस्थता जैसे वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रों पर बल देते हैं। यह अधिनियम परिवारिक विवादों में महिलाओं एवं बच्चों के हितों की विशेष रूप से रक्षा करता है तथा परिवारों को टूटने से बचाने का प्रयास करता है। 1991 एवं 2003 में इस अधिनियम में संशोधन कर इसे और अधिक प्रभावी बनाया गया।

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