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जम्मू-कश्मीर राजभाषा अधिनियम, 2020 (The Jammu and Kashmir Official Languages ​​Act, 2020)

जम्मू-कश्मीर राजभाषा अधिनियम, 2020 भारत का एक विशेष राज्य रहा है, जिसकी अपनी अनूठी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है। यहाँ की मुख्य भाषाओं में कश्मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और लद्दाखी शामिल हैं। संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था, जिसके कारण यहाँ के नीति-निर्णयों में केंद्र सरकार का प्रभाव सीमित था। 5 अगस्त, 2019 को भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया। इसके बाद, राज्य के प्रशासनिक और कानूनी ढाँचे में कई परिवर्तन किए गए, जिनमें "जम्मू-कश्मीर राजभाषा अधिनियम, 2020" भी शामिल है।
इस अधिनियम का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आधिकारिक भाषाओं को परिभाषित करना और उनके उपयोग को नियंत्रित करना है। यह अधिनियम उर्दू को राज्य की प्रमुख भाषा के रूप में मान्यता देता है, साथ ही हिंदी, कश्मीरी, डोगरी और अंग्रेज़ी को भी आधिकारिक कार्यों में उपयोग की अनुमति देता है। यह कदम क्षेत्र की बहुभाषी पहचान को स्वीकार करता है और सभी समुदायों की भाषाई आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करता है।

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