top of page

दादरा और नागर हवेली अधिनियम, 1961 (The Dadra and Nagar Haveli Act, 1961)

दादरा और नागर हवेली अधिनियम, 1961 भारत सरकार द्वारा पारित एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य दादरा और नागर हवेली क्षेत्र के प्रशासनिक और कानूनी ढांचे को व्यवस्थित करना था। यह अधिनियम 11 अगस्त, 1961 को लागू हुआ और इसके माध्यम से इस क्षेत्र को भारत संघ के एक संघ राज्यक्षेत्र के रूप में शामिल किया गया। इससे पहले, यह क्षेत्र पुर्तगाली शासन के अधीन था और 1954 में स्थानीय निवासियों और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रयासों से मुक्त होकर एक स्वतंत्र प्रशासनिक इकाई के रूप में कार्य कर रहा था।
दादरा और नागर हवेली का इतिहास औपनिवेशिक काल से जुड़ा है। पुर्तगालियों ने 18वीं शताब्दी में इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था और यह लंबे समय तक उनके शासन के अधीन रहा। 1954 में, स्थानीय निवासियों और भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के संयुक्त प्रयासों से इस क्षेत्र को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराया गया। इसके बाद, यह क्षेत्र एक स्वतंत्र प्रशासनिक इकाई के रूप में कार्य करने लगा, जिसे "वरिष्ठ पंचायत" द्वारा प्रशासित किया जाता था। 1961 में, भारत सरकार ने इस क्षेत्र को औपचारिक रूप से भारत संघ में शामिल करने के लिए दादरा और नागर हवेली अधिनियम पारित किया।

दादरा और नागर हवेली अधिनियम, 1961 ने इस क्षेत्र को भारत संघ में एकीकृत करने और उसके प्रशासनिक, कानूनी और न्यायिक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह अधिनियम न केवल ऐतिहासिक परिवर्तनों का प्रतिबिंब है, बल्कि यह क्षेत्र के विकास और सुशासन सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम भी है। इसके माध्यम से दादरा और नागर हवेली को राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।

Copyright © 2026 Lawcurb.in

bottom of page