दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 (The Delhi Police Act, 1978)
दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 भारत की राजधानी दिल्ली में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इस अधिनियम को 27 अगस्त, 1978 को लागू किया गया था, लेकिन इसे 1 जुलाई, 1978 से प्रभावी माना गया। यह अधिनियम दिल्ली पुलिस के संगठन, कार्यप्रणाली, अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करता है। दिल्ली की विशेष प्रशासनिक स्थिति (केंद्र शासित प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र होने के नाते) को ध्यान में रखते हुए, इस अधिनियम में पुलिस बल के प्रशासन, नियंत्रण और अनुशासन से संबंधित विस्तृत प्रावधान शामिल हैं।
इस अधिनियम का प्राथमिक उद्देश्य दिल्ली में एक संगठित और कुशल पुलिस बल की स्थापना करना है, जो सार्वजनिक सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और कानून के शासन को सुनिश्चित करे। अधिनियम में पुलिस बल के गठन, अधिकारियों की नियुक्ति, उनके कर्तव्यों और दंडात्मक शक्तियों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
पुलिस बल का गठन और संरचना:
अधिनियम के अनुसार, दिल्ली के लिए एक एकीकृत पुलिस बल होगा, जिसमें विभिन्न रैंक के अधिकारी और कर्मचारी शामिल होंगे।
पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) को पुलिस बल का नियंत्रण और पर्यवेक्षण करने का अधिकार दिया गया है।
अधिकारियों की नियुक्ति और भूमिकाएँ:
पुलिस आयुक्त, अपर आयुक्त, उप आयुक्त, और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान है।
विशेष परिस्थितियों में "विशेष पुलिस अधिकारी" (Special Police Officers) की नियुक्ति की जा सकती है।
अनुशासन और दंड:
पुलिस अधिकारियों के लिए अनुशासनात्मक नियम बनाए गए हैं।
अपराधों की रोकथाम, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और आपात स्थितियों में पुलिस की शक्तियों को परिभाषित किया गया है।
सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था:
धारा 28 से 37 तक सार्वजनिक स्थानों, यातायात, मेलों, जुलूसों और सार्वजनिक समारोहों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष प्रावधान हैं।
पुलिस को अव्यवस्था फैलाने वाले समूहों को रोकने, अवैध जमावड़े को तितर-बितर करने और आपातकालीन स्थितियों में कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।
अपराध नियंत्रण:
अधिनियम में हिंसा, दंगों और सार्वजनिक अशांति को रोकने के लिए विशेष उपायों का उल्लेख है।
धारा 39-46 तक अशांत क्षेत्रों (Disturbed Areas) में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 ने दिल्ली में कानून-व्यवस्था के प्रबंधन को मजबूत किया है। यह अधिनियम पुलिस को सार्वजनिक हित में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने का अधिकार देता है, साथ ही नागरिक अधिकारों की सुरक्षा का भी ध्यान रखता है। हालांकि, कुछ प्रावधानों (जैसे अशांत क्षेत्रों में पुलिस की विशेष शक्तियाँ) पर मानवाधिकार संगठनों द्वारा सवाल भी उठाए जाते हैं।






