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दिल्‍ली सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1971 (The Delhi Sikh Gurdwaras Act, 1971)

दिल्ली सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1971 (1971 का अधिनियम संख्या 82) भारत सरकार द्वारा 30 दिसंबर, 1971 को पारित किया गया था। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में स्थित सिख गुरुद्वारों और गुरुद्वारा संपत्तियों के प्रबंधन, नियंत्रण और प्रशासन को व्यवस्थित करना था। यह अधिनियम दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (Delhi Sikh Gurdwara Management Committee - DSGMC) की स्थापना करता है, जिसे गुरुद्वारों के दैनिक कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों, संपत्ति प्रबंधन और शैक्षणिक एवं सामाजिक कल्याण गतिविधियों की देखरेख का अधिकार दिया गया है।
इस अधिनियम के पीछे की ऐतिहासिक आवश्यकता सिख समुदाय के धार्मिक और प्रशासनिक मामलों में स्वायत्तता सुनिश्चित करना था। सिख गुरुद्वारों का प्रबंधन लंबे समय से सामुदायिक नियंत्रण में रहा है, लेकिन कानूनी ढांचे की कमी के कारण कभी-कभी विवाद और अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी। इस अधिनियम के माध्यम से एक संरचित और पारदर्शी प्रणाली स्थापित की गई, जिससे गुरुद्वारों के प्रबंधन में सिख समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

यह अधिनियम सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जिससे गुरुद्वारों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। इसके माध्यम से सिख धर्म के मूल्यों और परंपराओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ समुदाय के शैक्षणिक और सामाजिक विकास को भी प्रोत्साहन मिलता है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1971 ने सिख समुदाय के धार्मिक और प्रशासनिक मामलों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह अधिनियम न केवल गुरुद्वारों के प्रबंधन को सुचारु बनाता है, बल्कि सिख धर्म की शिक्षाओं और सेवाओं को समर्पित एक मजबूत संस्थागत ढांचा भी प्रदान करता है।

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