देहरादून (The Dehra Dun Act, 1871)
देहरादून अधिनियम, 1871 (अधिनियम संख्या 21) एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है जिसे 11 जुलाई, 1871 को पारित किया गया था। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य देहरादून जिले में सामान्य कानूनों और विशेष अधिनियमों के प्रवर्तन को वैधानिक रूप से सुनिश्चित करना था। यह अधिनियम ब्रिटिश शासन के दौरान लागू किया गया था और इसने देहरादून के प्रशासनिक और न्यायिक ढांचे को सहारनपुर जिले के साथ जोड़ने का काम किया।
19वीं शताब्दी में, ब्रिटिश सरकार ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासनिक सुधारों को लागू किया। देहरादून उस समय सहारनपुर जिले का हिस्सा था, लेकिन इसकी भौगोलिक और प्रशासनिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इसे एक अलग जिले के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता महसूस की गई। इस अधिनियम के माध्यम से सहारनपुर जिले में लागू कानूनों को देहरादून में भी लागू किया गया, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच कानूनी एकरूपता स्थापित हुई।
समय के साथ इस अधिनियम में कई संशोधन किए गए। उदाहरण के लिए, 1874, 1891, और 1950 में हुए संशोधनों ने इसके प्रावधानों को और स्पष्ट किया। 1950 के धारा अनुकूलन आदेश के बाद "उत्तर-पश्चिम प्रांत" को "उत्तर प्रदेश" से बदल दिया गया, जो भारत के संविधान के अनुरूप था।
देहरादून अधिनियम, 1871 ने देहरादून के प्रशासनिक और न्यायिक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह अधिनियम ब्रिटिश काल में किए गए प्रशासनिक सुधारों का एक उदाहरण है जिसने क्षेत्रीय प्रशासन को सुचारू बनाने में मदद की। आज भी इसके कुछ प्रावधान ऐतिहासिक और कानूनी अध्ययन के लिए प्रासंगिक हैं।






