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न्यायालय अवमान अधिनियम, 1971
न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971, भारतीय न्यायिक व्यवस्था में न्यायालयों की गरिमा एवं प्राधिकार की रक्षा हेतु लाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम का उद्देश्य न्यायालयों के कार्यों में बाधा उत्पन्न करने, न्यायाधीशों का अपमान करने या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी आचरण को रोकना है। यह अधिनियम दो प्रकार की अवमानना – सिविल (न्यायालय के आदेशों की अवहेलना) तथा आपराधिक (न्यायालय की अवमानना करने वाले कृत्य/वक्तव्य) को परिभाषित करता है। इसके तहत अवमानना करने वाले को जुर्माना या कारावास की सजा का प्रावधान है। यह कानून न्यायिक स्वतंत्रता एवं जनता के विश्वास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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