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न्यायालय फीस अधिनियम, 1870

कोर्ट फीस एक्ट, 1870 ब्रिटिश काल में न्यायालयों में दाखिल किए जाने वाले विभिन्न दस्तावेजों और याचिकाओं पर फीस निर्धारित करने के लिए लाया गया था। यह अधिनियम भारत में न्यायिक प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और सरकार के लिए राजस्व सृजन का एक स्रोत बनाने के उद्देश्य से बनाया गया था। इस कानून के तहत विभिन्न प्रकार के न्यायिक दस्तावेजों जैसे वाद पत्र, अपील, संशोधन याचिका आदि पर अदालती फीस का प्रावधान किया गया है। फीस की राशि मुकदमे के प्रकार और मूल्यांकन के आधार पर निर्धारित की जाती है। यह अधिनियम राज्य सरकारों को अपने-अपने राज्यों में फीस दरों में संशोधन करने का अधिकार भी देता है। यह कानून आज भी भारतीय न्याय प्रणाली में प्रासंगिक बना हुआ है और न्यायालयों में दाखिल किए जाने वाले दस्तावेजों पर लगने वाली फीस को नियंत्रित करता है।

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