भाण्डागारण (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2007 (The Warehousing (Development and Regulation) Act, 2007)
भाण्डारण (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2007 भारत सरकार द्वारा कृषि उपज और अन्य वस्तुओं के भंडारण से संबंधित गतिविधियों को विनियमित करने और भंडारण क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए लाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम को 19 सितंबर, 2007 को लागू किया गया था। यह अधिनियम भंडारण क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता लाने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिससे किसानों और अन्य हितधारकों को लाभ हो सके।
इस अधिनियम के पीछे मुख्य उद्देश्य भंडारण सुविधाओं को मानकीकृत करना, भंडारण रसीदों को विनियमित करना और एक भंडारण विकास और विनियामक प्राधिकरण की स्थापना करना था। यह अधिनियम कृषि उपज के भंडारण और वित्तीय लेन-देन को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भंडारण (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2007 ने भारत में भंडारण क्षेत्र को व्यवस्थित और विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके माध्यम से किसानों और व्यापारियों को भंडारण रसीदों के माध्यम से वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने में सहायता मिली है। यह अधिनियम कृषि उपज के भंडारण और विपणन को सुगम बनाता है, जिससे किसानों को उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलती है।
भंडारपाल के कर्तव्य और दायित्व: भंडारपाल को भंडारण के लिए जमा किए गए माल की सुरक्षा और उचित देखभाल सुनिश्चित करनी होती है। भंडारपाल माल की हानि या क्षति के लिए जिम्मेदार होता है, जब तक कि यह उसकी लापरवाही के कारण न हो।
भंडारण सुविधाओं का पंजीकरण: परक्राम्य भंडारण रसीद जारी करने वाले भंडारण सुविधाओं को WDRA के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य है। इससे भंडारण क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।
वित्तीय प्रबंधन: प्राधिकरण को केंद्र सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त होता है और यह अपने लेखों की जाँच भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा करवाता है।
अपराध और दंड: अधिनियम में भंडारपाल द्वारा धोखाधड़ी या लापरवाही के मामलों में दंड का प्रावधान है, जिसमें जुर्माना और कारावास शामिल हो सकते हैं।






