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भारतीय निखात निधि अधिनियम, 1878 (The Indian Treasure Trove Act, 1878)
भारतीय निखात निधि अधिनियम, 1878 एक ऐतिहासिक कानून है जो भारत में भूमि में गड़े हुए खजाने या छुपी हुई संपत्ति (निखात निधि) की खोज, दावा प्रक्रिया और वितरण को नियंत्रित करता है। यह अधिनियम कलक्टर (जिला अधिकारी) को ऐसी संपत्ति का प्रबंधन करने, वैध दावेदारों की पहचान करने और विवादों के निपटारे का अधिकार देता है। यदि कोई वैध दावेदार नहीं मिलता, तो संपत्ति को स्वामिहीन घोषित कर सरकार द्वारा अर्जित किया जा सकता है। भारतीय विधिक प्रणाली में इसका महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि यह प्राचीन या छुपी संपत्ति से जुड़े मामलों में एक स्पष्ट प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया प्रदान करता है, जिससे संपत्ति के अधिकारों का सुरक्षित और न्यायसंगत निपटान सुनिश्चित होता है।
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