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भारतीय मानक ब्यूयरो अधिनियम, 2016 (The Bureau of Indian Standards Act, 2016)

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की स्थापना का इतिहास वर्ष 1947 में शुरू होता है, जब भारत सरकार ने औद्योगिक और उपभोक्ता वस्तुओं के मानकीकरण की आवश्यकता को पहचाना। प्रारंभ में, भारतीय मानक संस्थान (ISI) के रूप में गठित इस संस्था को 1986 में भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम के तहत एक वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। इस अधिनियम का उद्देश्य माल, वस्तुओं, प्रक्रियाओं और सेवाओं के मानकीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रमाणन को सुनिश्चित करना था। 2016 में, इस अधिनियम को नए सिरे से संशोधित और अद्यतन किया गया, ताकि वैश्विक मानकों के अनुरूप एक मजबूत और व्यापक ढांचा प्रदान किया जा सके।
भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 का मुख्य उद्देश्य देश में माल, वस्तुओं, प्रक्रियाओं और सेवाओं के मानकीकरण, अनुरूपता मूल्यांकन और गुणवत्ता आश्वासन को बढ़ावा देना है। यह अधिनियम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने, उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने और देश में गुणवत्ता संस्कृति को विकसित करने के लिए बनाया गया है।
शासी परिषद: BIS के कार्यों का सामान्य नियंत्रण और निर्देशन शासी परिषद द्वारा किया जाता है, जिसमें केंद्र सरकार के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और उपभोक्ता संगठनों के सदस्य शामिल होते हैं।
कार्यकारी समिति: यह समिति शासी परिषद द्वारा सौंपे गए कार्यों का निष्पादन करती है।
महानिदेशक: BIS का प्रमुख कार्यकारी अधिकारी होता है, जो संस्था के दिन-प्रतिदिन के कार्यों का प्रबंधन करता है।
उपभोक्ता संरक्षण: अधिनियम उपभोक्ताओं को नकली और घटिया उत्पादों से बचाता है।
उद्योगों को लाभ: मानकीकरण से उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलती है।
आर्थिक विकास: गुणवत्ता आश्वासन से देश की आर्थिक विकास प्रक्रिया को गति मिलती है।

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