मंत्रियों के सम्बलमों और भत्तों से - सम्बन्धित अधिनियम, 1952 (The Empowerment and Allowances of Ministers Act, 1952)
मंत्रियों के वेतन और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1952 भारत सरकार के मंत्रियों को वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम को संसद द्वारा 12 अगस्त, 1952 को पारित किया गया था। यह अधिनियम केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्यों, जिसमें प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री शामिल हैं, को वित्तीय सुरक्षा और अन्य लाभ प्रदान करता है।
वेतन और भत्ते:
प्रत्येक मंत्री को मासिक वेतन और दैनिक भत्ता संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 के तहत निर्धारित दरों पर प्राप्त होता है।
यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता भी उसी दर पर दिया जाता है जो संसद सदस्यों के लिए निर्धारित है।
आवास सुविधा:
प्रत्येक मंत्री को बिना किराए के एक सुसज्जित आवास उपलब्ध कराया जाता है, जिसका उपयोग वह अपने पद की अवधि के दौरान और पद छोड़ने के बाद एक महीने तक कर सकता है।
यदि किसी मंत्री की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को एक महीने तक बिना किराए के आवास का उपयोग करने का अधिकार होता है। इसके बाद, वे निर्धारित किराए पर आवास का उपयोग कर सकते हैं।
संपर्क भत्ता:
प्रधानमंत्री को ₹3,500 प्रति माह, कैबिनेट मंत्रियों को ₹2,000 प्रति माह, राज्य मंत्रियों को ₹100 प्रति माह और उपमंत्रियों को ₹600 प्रति माह संपर्क भत्ता दिया जाता है।
कोविड-19 महामारी के दौरान, इस भत्ते में 30% की कटौती की गई थी।
यह अधिनियम भारत की स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती वर्षों में लागू किया गया था, जब देश में एक स्थिर और पारदर्शी प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता थी। इस अधिनियम का उद्देश्य मंत्रियों को उचित वित्तीय सहायता और सुविधाएं प्रदान करना था, ताकि वे बिना किसी आर्थिक चिंता के देश की सेवा कर सकें।
समय-समय पर इस अधिनियम में संशोधन किए गए हैं, जैसे कि 1985, 2001, 2010 और 2020 में। इन संशोधनों के माध्यम से वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं के नियमों को अद्यतन किया गया है। उदाहरण के लिए, 2020 के संशोधन में कोविड-19 महामारी के दौरान मंत्रियों के संपर्क भत्ते में 30% की कटौती की गई थी।
मंत्रियों के वेतन और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1952 एक व्यापक कानून है जो देश के मंत्रियों को वित्तीय सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान करता है। यह अधिनियम न केवल मंत्रियों के योगदान को सम्मानित करता है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करता है। इसका ऐतिहासिक महत्व इस बात में निहित है कि यह भारतीय लोकतंत्र में उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए एक मिसाल कायम करता है।






