विवाहित स्त्री सम्पत्ति अधिनियम, 1874 (The Married Womens Property Act, 1874)
विवाहित स्त्री संपत्ति अधिनियम, 1874 (Married Women's Property Act, 1874) ब्रिटिश भारत में महिलाओं के संपत्ति संबंधी अधिकारों को स्पष्ट करने और सुरक्षित करने के उद्देश्य से पारित किया गया एक महत्वपूर्ण कानून था। यह अधिनियम 24 फरवरी, 1874 को लागू हुआ और इसका संक्षिप्त नाम "1874 का अधिनियम संख्यांक 3" है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य विवाहित महिलाओं की मजदूरी, उपार्जन, और बीमा पॉलिसियों से प्राप्त संपत्ति को उनकी "पृथक संपत्ति" के रूप में मान्यता देना था, जिस पर उनके पति का कोई अधिकार नहीं होगा।
महिलाओं की आर्थिक स्वायत्तता:
इस अधिनियम ने भारत में विवाहित महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। इससे पहले, विवाहित स्त्रियों की संपत्ति पर उनके पतियों का अधिकार होता था, और वे अपनी संपत्ति को स्वतंत्र रूप से नियंत्रित नहीं कर सकती थीं।
ब्रिटिश कानूनों का प्रभाव:
यह अधिनियम ब्रिटिश कानूनी प्रणाली से प्रेरित था, जहाँ 19वीं शताब्दी में महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने के लिए समान कानून बनाए गए थे। भारत में इसके लागू होने से स्थानीय और औपनिवेशिक कानूनों के बीच एक समन्वय स्थापित हुआ।
धार्मिक विविधता का सम्मान:
अधिनियम ने हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, सिख और जैन धर्मों को इसके दायरे से बाहर रखा, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों के साथ कोई टकराव न हो। यह भारत की धार्मिक विविधता को ध्यान में रखते हुए एक संवेदनशील निर्णय था।
आधुनिक भारतीय कानूनों की नींव:
यह अधिनियम आगे चलकर भारतीय संपत्ति कानूनों, विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों से संबंधित कानूनों, के विकास में एक मील का पत्थर साबित हुआ। इसने भविष्य में बनने वाले कानूनों, जैसे कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956, के लिए एक आधार तैयार किया।
विवाहित स्त्री संपत्ति अधिनियम, 1874, भारत में महिलाओं के संपत्ति अधिकारों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसने विवाहित स्त्रियों को उनकी स्वयं की अर्जित संपत्ति पर अधिकार दिया और उन्हें कानूनी रूप से सशक्त बनाया। हालाँकि, इसकी कुछ सीमाएँ थीं, जैसे कि धार्मिक समुदायों को छूट देना, लेकिन फिर भी यह अधिनियम भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास था। आज भी इसका ऐतिहासिक और कानूनी महत्व बना हुआ है।






