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सोसाइटी रजिस्‍ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (The Societies Registration Act, 1860)

सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान पारित किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम को 21 मई, 1860 को लागू किया गया था और यह सामाजिक, वैज्ञानिक, धार्मिक, शैक्षणिक, और सार्वजनिक उपयोगिता के उद्देश्यों से स्थापित संगठनों (सोसाइटियों) के पंजीकरण और विनियमन के लिए बनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य संगठनों को एक कानूनी मान्यता प्रदान करना था, ताकि वे अपने उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें और कानूनी संरक्षण प्राप्त कर सकें।
यह अधिनियम भारत में सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों को एक संरचित ढाँचा प्रदान करने वाला पहला कानून था।
इसने शैक्षणिक, वैज्ञानिक, और धार्मिक संस्थाओं को कानूनी मान्यता देकर उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बाद के वर्षों में, इस अधिनियम को विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया और इसमें संशोधन भी किए गए।

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