हैदराबाद विश्वविद्यालय अधिनियम, 1974 (The University of Hyderabad Act, 1974)
हैदराबाद विश्वविद्यालय अधिनियम, 1974 भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में हैदराबाद विश्वविद्यालय की स्थापना और उसके प्रशासन, शिक्षा, अनुसंधान तथा अन्य संबंधित गतिविधियों को विनियमित करने के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। यह अधिनियम 3 सितंबर, 1974 को लागू हुआ और इसका उद्देश्य एक ऐसे विश्वविद्यालय की स्थापना करना था जो शिक्षा, अनुसंधान और ज्ञान के प्रसार के माध्यम से समाज की सेवा करे। इस अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय को विभिन्न शक्तियाँ और कर्तव्य प्रदान किए गए हैं, जिनमें शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का विकास, परीक्षाएँ आयोजित करना, डिग्रियाँ प्रदान करना, और शिक्षण एवं अनुसंधान के लिए संस्थानों की स्थापना करना शामिल है।
हैदराबाद विश्वविद्यालय की स्थापना का विचार भारत की शिक्षा नीति और उच्च शिक्षा के प्रसार के लिए बनाए गए राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप था। 1970 के दशक में भारत सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधारों की आवश्यकता को महसूस किया, जिसके तहत नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई। हैदराबाद विश्वविद्यालय को भी इसी दृष्टि से स्थापित किया गया था, ताकि यह क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा एवं शोध को बढ़ावा दे सके।
अधिनियम में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालय सभी जाति, धर्म, लिंग और वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के लिए खुला होगा। इसका उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है। विशेष रूप से पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं ताकि उन्हें शिक्षा के समान अवसर प्राप्त हो सकें।
विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रबंधन के लिए वित्त समिति का गठन किया गया है, जो बजट, आय-व्यय और संपत्ति के प्रबंधन की देखरेख करती है। विश्वविद्यालय को शुल्क, दान और सरकारी अनुदान के माध्यम से धन प्राप्त करने का अधिकार है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय को अपनी संपत्ति और निधियों का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता दी गई है।






